सब गुनहगार हैं कुदरत के कत्ल में, यूं ही हवाएं जहरीली नहीं हुईं! बहरहाल, शुक्रिया आईना दिखाने वाली बंदिशों का
By anand raikwar - June 04, 2020
वाकई, 68 दिन लॉकडाउन में गुजारे तो पता चला जिंदगी की कीमत क्या होती है। ये भी समझ आयाकि वो हम ही हैं जो खुद को साफ-पाक बताकर बाकी सबको गंदा करने का जुर्म कर रहे हैं। अलसाईसुबह की चाय से लेकरदेर रात के खाने तक हमने यू हींबातों-बातों मेंएक बार तो इस तोहमत को कुबूलकरके आंखें भी झुका ली।
बहरहाल, चार खंडों में -68 दिन का कोराना-उपवास खत्म हुआ। अब फिर वही हाल और हालात बन रहे हैं, फिर वही धूल, धुआं, गंदगी और जहरफैलना तय है। कुदरत ने तो इन दिनों में दिखा दिया कि, हम इंसानों के बिना भी वो बहुत खुश है। यकीन न आए तोये तस्वीरों वाले सबूत देखिए, जो हमने ही खुद को आईना दिखाने के लिए जमा किए हैं।
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source https://www.bhaskar.com/happylife/news/world-environment-day-special-photo-story-about-pollution-free-india-127370236.html


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