इस्तेमाल किए मास्क-ग्लव्स, पीपीई और सैनिटाइजर्स की बोतलों का कचरा समुद्र में पहुंचा, ये 450 साल बना रहेगा
By anand raikwar - June 09, 2020
लॉकडाउन के कारणहवा-पानी तो कुछ हद तक साफ हो गया,लेकिन कोरोना से बचने की शर्त परहम इंसानअपनी गंदीहरकतों से नदी-तालाबों और समुद्रोंके लिए नया खतरा पैदा कर रहेहैं। महामारी के बीच सिंगल यूज मास्क, पीपीई, ग्लव्स औरसैनेटाइजर की खपत रिकॉर्ड तोड़ रही है। लेकिन,इस्तेमाल के बाद लोग इन्हें ठीक से डस्टबिन मेंडिस्पोज ऑफनकरके,कहीं भी फेंक दे रहे हैं।
- सड़कों पर बिखरा मेडिकल वेस्टइंसानों के साथ पालतु पशुओं के लिएखतरनाक हैऔर बहकर समुद्र में पहुंचने के बाद जलीयजीवों को भी इससे नुकसान हो सकताहै।
- कोरोनावायरस को रोकने के लिए सबसे अधिक प्रभावी बताए जा रहे अधिकांश थ्री-लेयर मास्क पॉलीप्रोपिलीन के और ग्लव्सव पीपीई किट रबर व प्लास्टिक सेबने हैं।
- कार्बन के इस पॉलीमर की कुदरती माहौल में बने रहने की उम्र करीब 450 साल है।प्लास्टिक की तरह ही ये मास्क भी सैकड़ों सालों तक पर्यावरण के लिए खतरा बने रहेंगे।
ट्रीटमेंट प्लांट में लाया गया है। प्लांट के सुपरवाइजर डेव हॉफमैन का कहना है कि हमें इसका पता तब चला जब कुछ मास्क ऊपर तैर रहे थे। फोटो साभार : सीबीसी
आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
source https://www.bhaskar.com/happylife/news/people-are-not-disposing-of-the-sea-masks-ppe-gloves-due-to-human-activities-127391698.html

0 comments